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कवि हृदय में



*डॉ. अनिता सिंह
कोई आया है दिल में।

आज मेरे कवि ह्रदय में ।।
ओज भरी रवि की किरण में ।
चांद -तारों के नभ में।।
भावनाओं के अंकुरण में ।
साधना के जागरण में।।
प्रकृति के हरित कानन में।
उपवन के कुसुमित सुमन में ।।
मधुमास में उल्लासित पल्लव में ।
पक्षियों के मोहक कलरव में।।
निर्झर की निर्मल कल -कल में।
नीर भरी नदिया के शीतल जल में।।
मंदिर, मस्जिद और गुरविंदराणी में।
शून्य में, अनंत में, विश्वास में।।
अदृश्य ,अनाम है हर रिश्ते की आस में ।
जो समाया है हृदय के पावन उजास में।।
वही आया है आज प्रणय में।
मेरे कवि- हृदय में ।।

*डॉ. अनिता सिंह,बिलासपुर (छत्तीसगढ़ )

 

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