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जिंदगी सड़कों पर 



*प्रीति शर्मा 'असीम'

जिंदगी सड़कों पर ,

लाचार बैठी है।

 

अपने घर और काम से ,

बेजार बैठी है ।

 

कोरोना क्या..... मारेगा ।

इन जिंदगियों को,

 

जो जिंदगीयां,

जिंदगी से लड़ने को ,

तैयार बैठी हैं ।

 

जिंदगी सड़कों पर ,

लाचार बैठी है। 

 

घर -काम से,

निकाल दिया इनको, 

गाड़ी -बसों के लिए,

अपने घर तक जाने को ,

लाचार बैठी हैं।

 

सरकारें कहती है ।

मिलेगा खाना।

जिंदगी बदहालीयों में भी,

मुस्कुरा कर जिंदगी के साथ बैठी है ।

 

*प्रीति शर्मा 'असीम',नालागढ़ हिमाचल प्रदेश

 


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