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बासमती व्यंग्य की खुशबू: 'डेमोक्रेसी स्वाहा'















बहुत पुरानी कहावत है कि 'पूत के लक्षण पालने में नजर आ जाते हैं'। एक दूसरी कहावत है 'गुणवत्ता की परख के लिए चार दाने आवश्यक होते हैं।'


पच्चीस वर्षीय सौरभ जैन के संभावनाशील व्यंग्यकार होते जाने के लक्षण तो उनके सोशल मीडिया के छोटे छोटे कथनों और दैनिक भास्कर में उनके साप्ताहिक 'ह्यूमर ट्यूमर' जैसे रोचक स्तंभ में उनकी सटीक टिप्पणियों और दिलचस्प 'मीम्स' से गुजरकर ही दिखाई देने लगे थे। अब उनका व्यंग्य संग्रह 'डेमोक्रेसी स्वाहा' शीर्षक से इसी वर्ष विश्व पुस्तक मेले में 'भावना प्रकाशन' के माध्यम से 'नमूने के चांवल' की तरह लोकार्पित हो गया है।


यद्यपि इन व्यंग्य चांवल दानों की प्रारंभिक परख तो भूमिकाओं की शक्ल में वरिष्ठ पारखी श्री अरविंद तिवारी और समृद्ध और सक्रिय व्यंग्यकार श्री आलोक पुराणिक ने की ही है।
तथापि मेरा मानना है कि सौरभ के व्यंग्य में जायके की सुगंध है। जैसे जैसे चांवल पुराना होगा पकने पर बासमती की तरह इसकी खुशबू साहित्य और पाठक संसार को मोहित करती रहेगी।


सौरभ का लेखन विविधता से भरा है। पत्रकारिता के रास्ते से साहित्य की तरफ आते हुए उनका व्यंग्य आम पाठकों को सहजता से व्यंजना,कटाक्ष और उलटबासी के जरिये उद्वेलित करने का प्रयास करता है। निरंतर अखबारों और पत्रिकाओं में वृहद लेखन करते हुए वे उस भाषा के मुहावरे को भली प्रकार समझने में सफल हुए हैं जिससे पाठक ऊबता नहीं।


सौरभ जैन का यह पहला व्यंग्य संग्रह है। अभी उनके पास किताब की शक्ल में अपनी प्रस्तुति के लिए चयन के ज्यादा विकल्प नहीं होना सवाभाविक है। फिर भी कमजोर रचनाओं की संख्या इसमें नगण्य है।


यह बहुत महत्वपूर्ण है कि बदलते भारत के युवा रचनाकार होने से व्यंग्य के उनके विषयों में नई टेक्नोलॉजी और अपने समय की विशिष्टताओं को जगह मिलने के बावजूद स्थापित नैतिक जीवन मूल्यों और सत्य का आग्रह वे छोड़ते नहीं।


'डेमोक्रेसी स्वाहा' में कुल 52 आलेख हैं जिनमे  सौरभ जैन ने एक नागरिक की दृष्टि से देश,समाज,राजनीति के साथ साथ इस समय के वातावरण में घटित तमाम गतिविधियों, आग्रहों,पूर्वाग्रहों, आचार,विचार और भ्रष्टाचार पर सजग टिप्पणी करने की कोशिश की है।


जान बूझकर मैंने यहां संग्रह के आलेखों की पृथक पृथक विवेचना नहीं की है। मेरी अपेक्षा है कि पाठक इस संग्रह को अवश्य पढ़ें। निश्चित ही व्यंग्य की विशिष्ट सौरभ और जायका आपको सौरभ जैन की और नई रचनाएं पढ़ने को लालायित करेगा।
सौरभ जैन को इस पहले व्यंग्य संग्रह के लिए मेरी ओर से हार्दिक बधाई। ढेरों शुभकामनाएं।


व्यंग्य संग्रह - डेमोक्रेसी स्वाहा
लेखक - सौरभ जैन
प्रकाशक - भावना प्रकाशन, दिल्ली
कीमत - 195 रुपये
प्रकाशन वर्ष - 2020


*चर्चाकार-ब्रजेश कानूनगो, इंदौर














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