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भोज शोध संस्थान में हिंदी दिवस पर जनसंवाद व काव्यात्मक अभिव्यक्ति सम्पन्न






            

विश्व में हिंदी सबसे तेजी से बढ़ने वाली भाषा - कवि संदीप शर्मा 

 


 

हिंदी भाषा अपने आप में श्रेष्ठ है।भावनाएं व भावुकता हिंदी को अन्य भाषाओं से श्रेष्ठ बनाती है। हिंदी का परिष्कृत रूप सदियों से है। हिंदी को आर्थिक व राजनीतिक कारणों से कमजोर किया गया है। हिंदी भाषा कई साजिशों का शिकार रही है।  हिंदी आज भी विश्व के 170 देशों में सिखाई जा रही है। हिंदी का भविष्य हम पर ही निर्भर है।  हिंदी दिवस श्राद्ध पक्ष में आता है और कई लोग केवल श्राद्ध ही करते हैं । विश्व में हिंदी सबसे तेजी से बढ़ने वाली भाषाओं में से एक है।  नासा ने भी स्वीकार किया है कि हिंदी सर्वश्रेष्ठ फोनेटिक भाषा है। आज भी देश में 55 करोड़ से अधिक लोग हिंदी का उपयोग करते हैं। भारत में हिंदी का सम्मान सबसे जरूरी है। ये उद्गार  हिंदी दिवस पर भोज शोध संस्थान द्वारा आयोजित जनसंवाद में मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए कवि संदीप शर्मा ने व्यक्त किए।  लोग पूछते है एक दिन हिंदी दिवस मनाने से क्या लाभ, मेरा कहना है कोई हानि भी तो नहीं है। विशेष अतिथि के रूप में प्रसिद्ध कहानीकार श्री निसार अहमद ने कहा कि वे 1963 से अपने हस्ताक्षर हिंदी में कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि कानून का कार्य हिंदी में होना चाहिए। भाषा के प्रति स्वतंत्रता की कमी है। विदेशी भाषा अपने साथ विदेशी संस्कार लाती है। हमारे संबोधन भी बदलते जा रहे हैं। स्वागत व्यक्तव संस्थान के निदेशक डॉ दीपेंद्र शर्मा ने दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी मात्र भाषा नहीं मातृभाषा  है भाषा का साहित्य और इतिहास में विशेष महत्व होता है। अतः भाषा के प्रति सतर्कता जरूरी है । जनसंवाद के बाद काव्यात्मक अभिव्यक्ति में कैलाश बंसल, हरिहर दत्त शुक्ला, नंदकिशोर बावनिया, जयंत जोशी, कृष्ण कुमार दुबे, महेश त्रिवेदी, कथाकार रामेश्वर जोशी ,ईश्वर दुबे नकोई, राधा कृष्ण बावनिया, श्रीमती अनिता मुकाती और कवियत्री वंदना दुबे ने अपनी हिंदी महत्व की रचनाओं को प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत गुरुदत्त कांटे और अनूप श्रीवास्तव ने किया।  आभार ज्योतिषाचार्य रामगोपाल शर्मा ने व्यक्त किया। आयोजन संयोजन प्रभाकर खामकर, सुरेश मुवेल, सुनीता धार्वे और पराग भोसले का रहा। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रोता भी उपस्थित थे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकी मक्कड़ ने दी है।






 



 



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