म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

सदानीरा और जल गंगा संवर्धन अभियान, पर्यावरण के लिए जरुरी - राजेश सिंह कुशवाह

सदानीरा और जल गंगा संवर्धन अभियान, पर्यावरण के लिए जरुरी - राजेश सिंह कुशवाह

उज्जैन। हम अपने ही क्रियाकलापों से विश्व जलवायु के ढाँचे को बदल रहे हैं जिससे तापमान में वृद्धि, गंभीर प्राकृतिक आपदाएं और पेयजल की कमी आदि जैसे खतरे बढ़ते जा रहे हैं। प्रकृति का शोषण करते करते हम प्रकृति पर हक जमा बैठे हैं। 

ये विचार विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रेमचंद सृजन पीठ, उज्जैन द्वारा कालिदास अकादमी में आयोजित परिचर्चा 'पर्यावरण पर्व-प्रकृति है तो ही जीवन है' विषय पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विशाला सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष एवं सम्राट विक्रमादित्य विवि कार्यपरिषद के वरिष्ठ सदस्य श्री राजेशसिंह कुशवाह ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि सभ्यताएं नदी किनारे ही विकसित होती आई हैं और सदानीरा और जल गंगा संवर्धन जैसे अभियान, बेहतर पर्यावरण के लिए जरुरी हैं। मुख्य अतिथि कालिदास संस्कृत अकादमी उज्जैन के निदेशक डॉ. गोविन्द गंधे ने कहा कि प्रकृति पञ्च महाभूत से बनी हुई है और प्रकृति के प्रति श्रद्धा, आस्था का भाव रखते हुए प्रकृति को सुरक्षित रखने के प्रयत्न करने होंगे। विशेष अतिथि पुरातत्वविद डॉ. रमण सोलंकी ने वनीकरण और सघन वृक्षारोपण को आज की आवश्यकता बताया। विशेष अतिथि वरिष्ठ पर्यावरणविद एवं सचिव पर्यावरण समिति उज्जैन डॉ. प्रतिमा जोशी ने कहा कि हमें स्वयं आगे आकर पर्यावरण सरंक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करनी होगी। विशेष अतिथि अजय भातखंडे ने वृक्षारोपण के लिए हर सन्डे ,दो घंटे का नारा देते हुए वृक्षारोपण का महत्व बताया। 


आयोजन में वृक्षमित्र परिवार के अध्यक्ष अजय भातखंडे और डॉ. प्रतिमा जोशी का अतिथियों द्वारा सम्मान किया गया। परिचर्चा में बाल मंच के संरक्षक श्री सतीश दवे ने कहा कि हम 5 जून को शेष विश्व की तरह पर्यावरण दिवस मनाएं पर हमारा पर्यावरण पर्व तो हरियाली अमावस्या से शुरू होकर साल भर चलता ही रहता है। डॉ. राकेश डण्ड, श्री दिनेश दिग्गज, डॉ. शेखर मैदमवार, श्रीमती सरिता गर्ग, प. सर्वेश्वर शर्मा, डॉ माया बधेका, डॉ. पंकजा सोनवलकर, दिलीप चौहान, डॉ. अजय शर्मा, डॉ. संदीप नागर, डॉ. संदीप नाडकर्णी, डॉ. प्रीति पांडे ने अपने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किये। उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द के चित्र पर माल्यार्पण और दीप आलोकन कर परिचर्चा का शुभारम्भ अतिथियों ने किया। अतिथि स्वागत प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक श्री मुकेश जोशी ने किया। आयोजन में कुलसचिव श्री दिलीप सोनी, कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत पुराणिक, वरिष्ठ कवि अशोक भाटी, लघुकथाकार संतोष सुपेकर, सुरेंद्र सर्किट, सुगनचंद जैन, डॉ. महेंद्र पंड्या, स्वामी दिलमिलाके प. दिनेश रावल, कवयित्री डॉ.अनामिका सोनी, संगीता तल्लेरा, हेमंत लोदवाल, दीपक सोनी, अजय मेहता, प्रतिभा दवे, अनिल बारोड, संघ परिवार से श्री कश्यप आदि उपस्थित थे। इस समूचे आयोजन के सूत्रधार डॉ अजय शर्मा एवं डॉ संदीप नागर रहे। कार्यक्रम का गरिमामय संचालन डॉ. हरीशकुमार सिंह ने किया और आभार श्री शशांक दुबे ने व्यक्त किया। 

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