पद्मभूषण पं. सूर्यनारायण व्यास की पुण्यतिथि पर 'पुष्पांजलि' 22 जून को
उज्जैन। पद्मभूषण पंडित सूर्यनारायण व्यास ने 22 जून 1976 को यह देह छोड़ी थी और आगामी 22 जून 2016 को ठीक पचास साल हो जायेंगे। कौन थे पंडित सूर्यनारायण व्यास? शायद वर्ष अस्सी के बाद जन्मी पीढ़ी न जानती हो, पर उज्जयिनी के इस पितृपुरुष ने उज्जैन को विक्रम विश्वविद्यालय दिया, विक्रम कीर्ति मंदिर दिया, अखिल भारतीय कालिदास समारोह और कालिदास अकादमी उनकी ही देन हैं। सिंधिया शोध प्रतिष्ठान के भी वे ही संस्थापक थे, महाकाल का सरकारीकरण तो अभी वर्ष अस्सी के बाद हुआ इससे पूर्व महाकाल के इस महान भक्त ने महाकाल में शंख द्वार, चाँदी द्वार, मोजेक टाइल्स लगवायी, क्षिप्रा द्वार बनाया, बोहरा वार्ड बच्चों का अस्पताल बनवाया, आधुनिक उज्जयिनी का जो रूप हैं वह सब पद्मभूषण पंडित सूर्यनारायण व्यास की देन है।
पृथ्वीराज कपूर और भारत भूषण को उज्जयिनी ला कर उन्होंने विक्रमादित्य और कवि कालिदास दो फ़ीचर फ़िल्म बनायी। वर्ष दो हज़ार दो में उनके सौ वें जन्मदिन पर तब के प्रधानमंत्री अटलविहारी वाजपेयी ने अपने प्रधानमंत्री आवास पर उन पर डाक टिकट जारी की थी। अब उनकी पचासवीं पुण्यतिथि पर उज्जैन की बारी हैं, अपने निर्माता, संस्कारदाता पितृपुरुष को याद करने की।
अखिल भारतीय कालिदास परिषद के अध्यक्ष श्री राजशेखर व्यास ने बताया कि इस क्रम में 22 जून 2026 उनकी पुण्य तिथि पर पहला आयोजन पुष्पांजलि शाम 5 से 7 ठीक उसी वक्त जब उन्होंने मनुष्य देह छोड़ी थी और उज्जयिनी में सूर्यास्त हो गया था। उन्हें याद करने नगर के लोग इकट्ठा होंगे और उसके बाद जून से दिसंबर 2026 तक बचे हुए साल में भारतीय ज्ञानपीठ, माधव क्लब, अक्षर विश्व, ऋषि मुनि, विक्रम विश्वविद्यालय, विक्रम कीर्ति मंदिर, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज सिंहपुरी जहाँ उनका जन्म हुआ था, प्रेमचंद सृजन पीठ, प्रेस क्लब उज्जैन, टेपा सम्मेलन जिसका नामकरण उन्होंने किया था और उनके आवास भारती भवन पर भव्य दिव्य और गरिमापूर्ण आयोजन किए जाएँगे। आयोजन समिति के संयोजक डॉ हरीश कुमार सिंह एवं मुकेश जोशी ने उज्जैनवासियों से आग्रह किया हैं कि वह खुले हृदय से उज्जयिनी के सूर्य को 22 जून से याद करने वाले सभी आयोजन में शामिल हो और नगर के लिए सांस सांस अर्पित करने वाले महापुरुष की याद को याद में रखे।



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