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आईएएस और अन्य विभागों के बीच पदोन्नति में खत्म हो भेदभाव

डॉ चन्दर सोनाने
अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा , पुलिस सेवा और वन सेवा के अधिकारियों का जब चयन होता है तो उन्हें अपनी सेवाएँ देने हेतु देश के राज्य आवंटित किए जाते हैं । प्रशिक्षण के बाद उनकी सेवाएँ आवंटित राज्य को सौंप दी जाती है । इसके बाद राज्य ही उनकी नियुक्ति और बाद में स्थानांतर करता है । यानी वे उस राज्य के लोक सेवक हो जाते हैं ।यहाँ तक तो ठीक है । किंतु जब पदोन्नति की बात आती है तो अखिल भारतीय सेवा के इन अधिकारियों और राज्य के सभी 108 विभागों के अधिकारियों तथा कर्मचारियों के बीच खुले आम भेदभाव किया जाता है । 
ये सब कैसे होता है ? आइये , आपको इस गोरखधंधे की कहानी सुनाते हैं ! आप सब जानते हैं अखिल भारतीय सेवा के तीन अधिकारी होते हैं आईएएस , आईपीएस और आईएफएस । प्रत्येक वर्ष दिसंबर माह में इनकी डी पी सी यानी विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक अनिवार्य रूप से हो ही जाती है । और हर हाल में दिसंबर माह की अंतिम तारीख 31 दिसंबर को शाम को या रात को या आधी रात को पदोन्नति के आदेश निकल ही जाते हैं । और हर साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी को उन्हें पदोन्नति का तोहफा मिल ही जाता है और इसी दिन ये सब अधिकारी जो जहाँ हैं वहीं पदोन्नति का पुरस्कार प्राप्त कर ही लेते हैं । कभी भी किसी भी साल ऐसा नहीं हुआ हो ऐसा कोई भी रिकार्ड नहीं है ! सब की मिलीभगत से आईएएस का तो ये रिकार्ड अभी तक नहीं टूटा है । यदि किसी साल दुर्भाग्य से आईपीएस या आईएफएस का नियत तिथि तक पदोन्नति आदेश नहीं निकलते हुए कुछ दिन लेट हो भी जाता है तो इन दोनों विभागों के अधिकारी कभी भी ज्वाईन करें उन्हें हर हाल में नए साल को 1 जनवरी से ही सभी लाभ मिलते हैं । यानी नुकसान बिल्कुल नहीं ! है ना बढ़िया शानदार व्यवस्था ! 
आप मेरी उक्त बातों का शायद विश्वास नहीं करें इसलिए आइये , नए साल के ताजा उदाहरण आपको बताते हैं । इस वर्ष 2020 की दिसंबर माह की 31 तारीख को 67 आईएएस अधिकारियों के पदोन्नति आदेश निकले । इन में से 2 अपर सचिव सचिव बनें यानी उन्हें उच्च वेतनमान मिला । 19 को प्रवर श्रेणी वेतनमान , 33 को कनिष्ठ प्रशासनिक वेतनमान और 13 आईएएस को वरिष्ठ समय वेतनमान की पदोन्नति का नए साल में तोहफा मिला है । अब बात करें आईपीएस की पदोन्नति का । कुल 9 आईपीएस को इस साल नए साल के तोहफे में पदोन्नति मिली । इनमें से 2 एडीजी डीजी बन गए । 2 आईजी एडीजी और 5 डीआईजी आईजी बन गए । सभी पदोन्नति पाए आईएएस और आईपीएस को तहे दिल से बधाई । 
आईएएस और आईपीएस की हर वर्ष नियत तिथि पर पदोन्नति का खुल कर विरोध नहीं हो , इसलिए उन्होंने बड़ी ही चालाकी से राज्य प्रशासनिक सेवा और राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को भी पदोन्नति समय पर मिल जाए इसके लिए एक नया ही रास्ता निकाला । अर्थात अंग्रेजों की नीति फूट डालो और राज करो को अपनाया । इसके लिए उन्होंने इन दो सेवाओं को भी पदोन्नति के नए नियम बनाये । इससे उनकी भी समयमान वेतनमान के साथ - साथ पद की भी पदोन्नति मिल जाती है । हाल ही में जनवरी माह के मध्य में इन राज्य प्रशासनिक सेवा के 21 अधिकारियों को वरिष्ठ श्रेणी के वेतनमान से प्रवर श्रेणी वेतनमान में पदोन्नति दे दी गई है । ये अधिकारी भी कभी भी ज्वाइन करें , इन्हें लाभ 1 जनवरी 2021 से ही लाभ मिलेगा । हैं ना बढ़िया और शानदार ! इन्हें भी तहे दिल से बधाई ।
अब हम बात करते हैं बेचारे 108 विभागों के अधिकारियों की पदोन्नति की ! इनका दोष और दुर्भाग्य यह है कि न तो ये अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी हैं ना ही राज्य प्रशासनिक सेवा के ही अधिकारी हैं ! सो इन्हें उनके जैसी पदोन्नति कैसे मिल सकती है । कहने को तो राज्य सरकार में पदोन्नति के नियम बना रखे हैं । किंतु इनका पालन और क्रियान्वयन करना जिनके हाथों में हैं वे हैं आईआईएएस अधिकारी ! और उनका मूड होता है तो डीपीसी करते हैं और मूड नहीं तो कुछ भी कर लो वे डीपीसी नहीं करते हैं तो नहीं करते हैं ! जब डीपीसी ही नहीं तो पदोन्नति कैसी ? 
जब इन 108 विभागों में बहुत असंतोष होने लगा तो सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा परिपत्र क्रमांक सी. 3 - 2 / 2013 / 1 / 3 दिनांक 2 फरवरी 2013 जारी कर सभी विभागों में पदोन्नति समिति यानी डीपीसी की बैठक अनिवार्य रूप से प्रत्येक वर्ष के माह फरवरी के अंत तक करने के निर्देश जारी किए गए । सभी विभागों के विभागाध्यक्ष और विभाग प्रमुख कौन थे ? ये ही आईएएस ! उनका मूड नहीं था तो किसी ने भी फरवरी माह में डीपीसी नहीं की । फिर असंतोष भड़का तो सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा एक और आदेश क्रमांक सी. 3 - 2 / 2013 / 3 / एक दिनांक 24 अप्रैल 2013 जारी कर अब साल में अनिवार्य रूप से दो बार डीपीसी की बैठक प्रत्येक वर्ष के प्रारम्भ में यथाशीघ्र माह जनवरी - फरवरी में और दूसरी बैठक माह अगस्त - सितंबर में करने के निर्देश जारी कर दिए ।
सरकार का काम था आदेश जारी करना सो उसने कर दिया ! इन आदेशों का पालन करना तो विभागाध्यक्षों और विभाग प्रमुखों को था और उनका मूड नहीं था तो नहीं था ! इसलिए किसी भी विभाग ने वर्ष 2013 से 2017 तक पाँच साल तक किसी भी वर्ष में साल में दो बार डीपीसी नहीं की । वर्ष 2017 में पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर ये प्रकरण हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया । और वहाँ मिली सिर्फ तारीख पर तारीख ! ! ! 
अब इन समस्त 108 विभागों के विभागाध्यक्षों और विभाग प्रमुखों से कौन पूछ सकता है कि अभी पदोन्नति का प्रकरण कोर्ट में है तो इतना ही बता दें कि वर्ष 2013 से वर्ष 2017 तक पाँच साल तक इन आईएएस अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी और सरकार के आदेशों का पालन क्यों नहीं किया ? इनकी कार्य के प्रति लापरवाही , गैरजिम्मेदारी और नाकारापन की सजा इन्हें क्यों नहीं दी जानी चाहिए ? दूसरा सवाल ये कि जब इन 108 विभागों की डीपीसी नहीं होने के कारण हजारों अधिकारी और कर्मचारी बिना पदोन्नति को प्राप्त किए सेवानिवृत हो गए हैं तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है ? ? ?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रत्येक वर्ष बिना नागा आईएएस , आईपीएस और आईएफएस का तथा राज्य प्रशासनिक अधिकारियों एवं राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों का प्रमोशन हो रहा है तो 108 विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रमोशन क्यों नहीं हो रहा है ? क्यों नहीं हो रहा है ? ? ? 
प्रदेश के सभी 108 विभागों के हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अनेक वर्षों से हो रहा यह भेदभाव कौन खत्म करेगा ? प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान एक संवेदनशील मुख्यमंत्री के रूप में जाने पहचाने जाते हैं तथा कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रति वे संवेदनशील भी हैं तो उन तक ये बात कौन पहुँचायेगा ? क्या आप ये काम कर पाएँगे ? ? ?
(लेखक म.प्र. के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी है)

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