Subscribe Us

आई बारिश



✍️अनुज पांडेय


आई बारिश,
गर्मी में शिशिर की
पूरी ख्वाहिश।


मिट्टी में नमी
सूर्य देव छिप गए
दौड़ में गर्मी।


आई मुस्कान
कृषकानन पर,
रोपता धान ।


सभी हर्षाए,
आफ़त में है गर्मी
किधर जाए?


हर्षित मन
भीगते उपवन
आया सावन।


जड़ें सिंचित
पाकर बारिश को
पेड़ हरित।


*पड़ौली,गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)


अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।


साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com


यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw 


टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां