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मैं तूफानों से निकला हूं



*राजीव डोगरा 'विमल'

 

मैं तूफानों से निकला हूं

मुझे आंधियों से 

अब कोई डर नहीं,

मैं महाकाल से मिला हूं 

मुझे काल से 

अब कोई डर नहीं ,

मैं अपने अस्तित्व को

मिटा चुका हूँ,

मुझे जीवन से अब 

कोई मोह नहीं।

मैं माँ काली से प्रेम

पा चुका हुँ,

मुझे दुनिया वालों से 

अब कोई स्नेह नहीं।

 

*कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

 


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