Subscribe Us

विघ्नसंतोषी पड़ोसी की पीड़ा(व्यंग्य)


*विवेक जगताप*


आज बड़े दिनों बाद मित्र चवन्नीलाल मिला,चवन्नीलाल बहुत खुश और थोड़ा उदास भी था। इस उदासी मिश्रित खुशी का राज राज ना रह जाए, इसलिए इस राज का पर्दाफाश करना हमारे लिए तो जरूरी हो गया था। हमने पूछ लिया- भाई चवन्नी,,ये किस खुशी में तुम्हारे होठों पर मुस्कुराहट थिरक रही है, और साथ ही किस गम में तुम्हारे माथे पर सल भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। तुम्हारे ताजा-ताजा फेशियल किए चेहरे पर कहीं खुशी तो कहीं गम क्यों छलक रहा है।
चवन्नीलाल तो जैसे मेरे इस सवाल की प्रतीक्षा ही कर रहा था। चवन्नीलाल ने अपनी पीड़ा का पुराण बताना शुरू किया और कहा कि मेरे परिवार में हम 5 भाईयों में सबसे छोटा भाई बड़ा ही रूपवान है। इसलिए परिवार का लाड़ला भी है। जब पिताजी ने घर, जमीन, जायदाद का बंटवारा किया तो हम सभी की मर्जी से सबसे छोटे भाई को घर का सबसे सुन्दर और बड़ा हिस्सा मिला, खेती में भी सबसे उर्वरक जमीन दी और पैसा भी हम पांच भाईयों में सबसे ज्यादा सबसे छोटे भाई को ही मिला था। यहां तक कि पिताजी की जगह नोकरी में अनुकम्पा नियुक्ति भी उसे ही मिली थी।
इतना सब करने के बाद भी हमारे उस छोटे भाई को हमारे इस प्यार और त्याग की कद्र ही नहीं रही। बस, बात बात पर हमारे हमेशा से नाखुश पड़ोसी के बहकावे में आकर हमारा छोटा भाई हमसे आए दिन लड़ता झगड़ता रहता। पड़ोसी जैसा जैसा भड़काता वैसा वैसा हमारे खिलाफ करता रहता। छोटा लाड़ला भाई हमारे परिवार द्वारा दिए गए विशेषाधिकारों व लाभ का हमारे ही खिलाफ हमें तकलीफ पहुचाने में ही इस्तेमाल कर रहा था। 


चवन्नीलाल ने थोड़े आक्रोश में आते हुए अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि हमने हमारे पड़ोसी के बहकावे में बहक चुके हमारे लाड़ले बिगड़ैल और सही रास्ते से भटके छोटे भाई की मनमानी, बदतमीजी सहन कर ली पर हम नहीं चाहते थे कि हमारे बच्चे और परिवार की भावी पीढ़ी को भी यही सब झेलना और भुगतना पड़े। इतना कहते ही चवन्नीलाल कुछ पल के लिए मौन होकर अपनी पूरी खुल चुकी पलकों और उसके अंदर से झांकती आंखों से मुझे एकटक बिना बोले देखते जा रहे थे।अचानक से आए कुछ पल के इस मौन के सन्नाटे को तोड़ते हुए मैंने चवन्नीलाल से पूछा,,तो फिर छोटे भाई की अक्ल ठिकाने लगाने और सही रास्ते पर लाने के लिए क्या किया आपने। चवन्नीलाल बोले, करना क्या था, जिन कारणों से ज्यादा लाड़ प्यार में छोटा भाई बिगड़ कर बेफिक्र हो गया था वो सभी विशेष सुविधाएं हमारे परिवार ने छोटे भाई से वापस ले ली। साथ ही छोटे भाई की बदतमीजियों को सहन करने की बजाय प्रतिकार करना भी शुरू कर दिया। इसका असर बहुत जल्द सामने आया और छोटे भाई की दादागिरी की हवा पूरी तरह से निकल गई। छोटा भाई समझ गया कि अब भी अगर वो नहीं सुधरा तो उसके बड़े भाई उसे खुद सख्ती के साथ सुधार देंगे। इसलिए छोटा भाई खुद ब खुद सही लाइन पर आ गया और बेवजह के आए दिन के झगड़े, विवाद सब बंद कर शांति से रहना सीख गया।


मैंने कहा, ये तो बहुत अच्छी खबर है। फिर क्यों तुम्हारी इस खुशी में भी गम की झलक दिखाई दे रही है। चवन्नीलाल बोला,,छोटा भाई तो सही रास्ते पर आ गया लेकिन उसे हमारे खिलाफ भड़काकर अपने मतलब के लिए बात-बात पर भड़काने वाला हमारा पड़ोसी इन दिनों आग बबूला हो रहा है। उसके सारे मंसूबों पर पानी फिर गया है। मेरे मुंह से तपाक से निकल ही गया कि कही तुम्हारे पड़ोसी के अंदर पाकिस्तान का भूत तो नहीं प्रवेश कर चुका है। क्योंकि कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद जिस तरह से भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के पेट में बेवजह की पीड़ा हो रही है ठीक उसी तरह की स्थिति से चवन्नीलाल तुम्हारा पड़ोसी भी गुजर रहा है। इतना सुनते ही चवन्नीलाल भी मंद मंद मुस्कुरा दिए। मानो मेरी बात पर मुस्कुराकर मौन सहमती व्यक्त कर रहे हो।
*विवेक जगताप,राजबाड़ा चौक,धरमपुरी जिला धार (म.प्र.),मो.-95840909697000338116


टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां